हिंदी उन सभी गुणों से अलंकृत है जिनके बल पर वह विश्व की साहित्यिक भाषाओं की अगली श्रेणी में सभासीन हो सकती है। - मैथिलीशरण गुप्त।

अद्भुत दोहा

इस दोहे में एक ही अक्षर ‘न’ का प्रयोग किया गया है।

नोनी नोनी नौनि नै, नोने नोनै नैन।
नाना नन ना नाननै, ननु नूनै नूने न॥

इस एक ही दोहे के कई संस्करण हैं, जैसे–

नोनी नोनी नौनि नै, नोनै नोनै नैन।
नाना नन नाना नने, नाना नूने नैन॥

नोनी नोनी नौनि नै, नोने नोनै नैन।
नाना नन ना नाननै, नाना नूनै नैन॥

नोनी नोनी नो निनै, नोने नोने नैन।
ना ना न न ना ना न नै, न नु नूनै नू नैन॥

इसका सरलार्थ आप कामेंट्स बॉक्स में दे सकते हैं।

[भारत-दर्शन संकलन] 

इसका सरलार्थ आप कमेंट बॉक्स में दे सकते हैं।

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